Friday, September 21, 2018

हैदराबाद मध्ये कायकाय पहाल ?

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          हैदराबाद मध्ये कायकाय पहाल ?

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           1. गोवळकोंडा किल्ला,हैद्राबाद
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 गोवळकोंडा किल्ला हा हैद्राबादच्या गतकालीन वैभवशाली इतिहासाचा एक भग्न साक्षीदार आहे शहरापासून १६ की.मी.वर. कुतुबशाही साम्राज्याची जवळजवळ दोन शतके राजधानी असलेल्या या किल्याच्या बाह्य भिंतीचा घेर ७ कि.मी. असून, त्या काळी राजाबरोबर बहुसंख्य प्रजाही किल्ल्याच्या आतच रहात असे या भक्कम किल्ल्याला ८७ अर्धवर्तुळाकृती बुरुज आणि ८ भली मोठी प्रवेशद्वार होती. त्या काळी गोवळकोंडा हे ही-यांच्या बाजारपेठ, उत्पादनाच एक महत्वाचं केंद्रच होत.

              जगप्रसिद्ध कोहिनूर हिरा येथलाच! ४७० पाय-या ६१ मीटर्स उंचीवरील एके काळच्या या दणकट किल्यात ध्वनिशास्त्राचा अचूक वापर केलेला आहे. किल्याच्या पायथ्याच्या दरवाजाजवळ टाळी वाजवली असता तिचा आवाज माथ्यावर सुस्पष्ट  ऐकू  येतो. त्यामुळे कोणी आल्याची सूचना आगाऊ देता येत असे. आंध्र प्रदेश पर्यटन महामंडळामार्फत गोवळकोंड्याला रोज सांयकाळी इंग्रजीतून आणि काही दिवस हिंदीतूनही ध्वनी प्रकाश कार्यक्रमांचे आयोजन केल जात.

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                 2. चारमिनार, हैदराबाद .

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कुतब शाही साम्राज्य के पाँचवे शासक सुल्तान मुहम्मद कुली कुतब शाह ने 1591 में चारमीनार को बनवाया था। अपनी राजधानी गोलकोंडा को हैदराबाद में स्थानान्तरित करने के बाद उन्होंने हैदराबाद में चारमीनार का निर्माण करवाया। चारमीनार के वजह से आज हैदराबाद को वैश्विक पहचान मिली है।

आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) के अनुसार, चारमीनार के बारे फ़िलहाल यह रिकॉर्ड दर्ज किया गया है की, “चारमीनार के निर्माण की वजह की बहोत सी कथाये है। जबकि बहोत से लोगो का यह मानना है प्लेग की बीमारी का संक्रमण रोकने के लिये चारमीनार को शहर के मध्य में बनाया गया है।” उस समय यह एक गंभीर बीमारी थी, जिससे इंसान मर भी सकता था। कहा जाता है की मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने यह मस्जिद बनवाकर यहाँ प्रार्थना की थी।

चारमीनार के बारे में कुछ रोचक बाते –

1. इमारत में बनी चार मीनार की वजह से इसकी खूबसूरती में चार चाँद लग जाते है।

2. कहा जाता है की चारमीनार की चार मीनारे इस्लाम के पहले चार खलीफो का प्रतिक है।

3. मुहम्मद कुली कुतब शाह ने 1591 में इसका निर्माण किया था।

4. कहा जाता है की उसका निर्माण करने के बाद मुहम्मद कुली ने वहा अल्लाह से प्रार्थना की थी।

5. असल में मस्जिद चारमीनार के सबसे उपरी मंजिल पर बनी हुई है।

6. चारमीनार में पत्थरो की बालकनी के साथ ही एक छत और दो गैलरी भी है जो छत की तरह दिखाई देती है।

7. चारो मीनारों को एक विशिष्ट रिंग से चिन्हित किया गया है जिसे हम बाहर से देख सकते है।

8. मीनार की मुख्य गैलरी में 45 लोगो के प्रार्थना करने जितनी जगह है।

9. चारमीनार हैदराबाद की मुख्य इमारतो में से एक है।

10. उपरी मंजिल पर जाने के लिये आपको 149 हवाई सीढियाँ चढ़ने की जरुरत होगी। सभी मीनारे 149 हवाई सीढियो से पृथक की गयी है।

11. मीनार की हर तरफ एक बड़ा वक्र बना हुआ है जो 11 मीटर फैला और 20 मीटर ऊँचा है।

12. कहा जाता है की चारमीनार और गोलकोंडा किले के बिच एक गुप्त मार्ग भी बना हुआ है, जो पहले कुली कुतब शाह की राजधानी थी और आपातकालीन समय में इस गुप्त मार्ग से राजघराने के लोगो को सुरक्षित रूप से एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाता था। लेकिन आज भी उस गुप्त द्वार की वास्तविक जगह किसी को नही पता है।

13. हर एक वक्र पर एक घडी लगी हुई है जो 1889 में बनायी गयी थी।

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        3.नेहरू प्राणी संग्रहालय , हैदराबाद .
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मोठे प्राणी संग्रहालय पाहायचे असेल तर हैदराबादला जायला हवे . नेहरू जिऔलॉजिकल पार्क .

हे पार्क मीर आलाम टॅक जवळ आहे . हे पार्क सोमवारी बंद असते . इतर वेळी ८ ते ५.३० चालू असते . तिकिट दर २५ रुपये आहे .

हे पार्क ३८० एकरवर वसलेले आहे . हा पार्क फिरण्यासाठी दोन सोयी आहेत . एक म्हणजे बॅटरीवरची गाडी व दुसरी ट्रेन . आम्ही ट्रेन पकडली व पार्क पाहिला .

खूप वेगवेगळे प्राणी आहेत . कासव जवळ जवळ माझ्या कंबरे एवढे उंच आहे . जिराफ हा वेगळा प्राणी पाहिला . संपुर्ण दिवस कसा गेला हे कळलेच नाही .

एकदा भेट दयावी असे हे ठिकाण आहे .


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              4. फलकनुमा पैलेस, हैद्राबाद।

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फलकनुमा महल हैदराबाद, तेलंगाना, भारत में है। यह पलेस पैगाह परिवार का था, और बाद में जिस पर हैदराबाद के निजाम का अधिपत्य था।

यह पलेस चारमीनार से 5 किमी दूर फलकनुमा में 32 एकड़ (13 हेक्टर) क्षेत्र में है। यह हैदराबाद के प्रधान मंत्री नवाब विक्र-उल-उमरा और निजाम VI, नवाब मीरबूब अली खान बहादुर के चाचा और भाई, द्वारा बनाया गया था। फलकनुमा का उर्दू में अर्थ है “आकाश की तरह” या “मिरर ऑफ़ द स्काई”।

एक अंग्रेजी वास्तुकार ने महल को बनवाया था। निर्माण के लिए आधारशिला 3 मार्च 1884 को सर विकार द्वारा रखी गई थी; वह हैदराबाद के तीसरे निजाम एच. एच. सिकंदर जेह बहादुर के पोते थे।

निर्माण पूरा करने और महल को प्रस्तुत करने में नौ साल लग गए। यह पलेस पूरी तरह से इटालियन संगमरमर और ग्लास खिड़कियों के साथ बनाया गया है और 1,011,500 वर्ग फुट के क्षेत्र को कवर करता है।

महल एक बिच्छू के आकार में बनाया गया था जिसमें उत्तर में पंख के रूप में फैले दो डंडे थे। मध्य भाग मुख्य भवन और रसोईघर, गोल बंगला, जनाना महल और हरेम क्वार्टर दक्षिण में फैला हुआ है। नवाब एक उत्सुक यात्री था, और इटालियन और ट्यूडर का मेल इस वास्तु वास्तुकला में दिखाई देता हैं।

महल के मुख्य आकर्षण में से एक राज्य रिसेप्शन रूम है, जहां छत को सोने का पानी चढ़ा कर सजाया गया है।

महल में 60 कमरे और 22 हॉल हैं। इसमें चित्रकारी, मूर्तियों, फर्नीचर, पांडुलिपियां, किताबें और एक व्यापक जेड संग्रह शामिल है। इसमें एक नक्काशीदार अखरोट छत के साथ एक पुस्तकालय है, विंडसर कैसल में एक की प्रतिकृति; यह कुरानों का एक व्यापक संग्रह था।

डायनिंग हॉल 101 मेहमान बैठ सकते हैं। कुर्सियां हरे चमड़े के साथ नक्काशीदार रोसेवेड से बने हैं। रकाबियों चमचों इत्यादि का सेट सोना और क्रिस्टल से बना था।

यह महल निजाम परिवार की निजी संपत्ति थी, और आम तौर पर 2000 तक जनता के लिए खुला नहीं था।

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                 6.मक्का मस्जिद हैदराबाद

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मक्का मस्जिद, चारमीनार के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यह हैदराबाद और सिकंदराबाद की सबसे बड़ी मस्जिद है।

इस मस्जिद के निर्माण की शुरुआत 1617 में मुहम्मद कुली क़ुतुबशाह ने की थी लेकिन इसको पूरा औरंगज़ेब ने 1684 में किया था।इसके विशाल स्तंभ और मेहराब ग्रेनाइट के एक ही स्लेब से बनाए गए हैं।पत्थर से बनी होने के बावज़ूद यह मस्जिद अपने निर्माण और स्थापत्य कला के लिहाज़ से बेजोड़ है।यह कहा जाता है कि यहाँ के मुख्य मेहराब को मक्का से लाए गए पत्थरों से बनाया गया था, इसलिए इसका नाम मक्का मस्जिद रखा गया।मक्का मस्जिद प्राचीन और अरबी वास्तु शिल्प के संगम के चलते पर्यटकों को आकर्षित करती है।मक्का मस्जिद लगभग 300 फीट एकड़ में बनी हुई है।एक साथ 10 हज़ार लोग इस मस्जिद में नमाज़अदा कर सकते हैं।इसके पास ही असफ़जाही राजाओं की क़ब्र भी देखी जा सकती है।

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                  7. NTR गार्डन, हैद्राबाद।

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आंध्र प्रदेश चे सर्वात लोकप्रिय मूख्यमंत्री श्री एन टी रामा राव याचे स्मृती प्रित्यर्थ ntr गार्डन स्थापना झाली।

हि गार्डन 36 एकर पसरलेली आहे। हि गार्डन तयार करण्यास 40 कोटी रुपये 2002 साली लागले।

सर्वांत छान वातावरण व संध्याकाळी फिरण्यास उत्तम गार्डन आहे।

या बागेत तुम्ही वेगवेगळी दालने पाहू शकता। जसे की, बोट राईड, जापनिझ गार्डन,कारंजे,मिनी ट्रेन।

सध्या येथे desert गार्डन पण आहे।

हि बाग हुसेन सागर च्या जवळ आहे।


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             10.सालारजंग संग्रहालय,हैद्राबाद।

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सालारजंग संग्रहालय हे भारताच्या हैदराबाद शहरातील एक प्रसिद्ध कलासंग्रहालय आहे. अनेक निजामकालीन ऐतिहासिक व दुर्मिळ वस्तू येथे प्रदर्शनासाठी ठेवल्या आहेत. सालारजंग हे भारतातील तिसरे मोठे संग्रहालय असून केवळ एका व्यक्तीने जमवलेल्या वस्तुंपासुन तयार झालेले हे जगातील सर्वात मोठे संग्रहालय आहे. सालारजंग संग्रहालयात अंदाजे ४३,००० वस्तु व ५०,००० पुस्तके आहेत.
हैद्राबादच्या सातव्या निजामाचे पंतप्रधान नवाब मीर युसुफ अली खान सालारजंग (तिसरे) ह्यांनी ह्या दुर्मिळ वस्तू जमविण्यासाठी ३५ वर्षे मेहनत घेतली व त्यासाठी आपल्या मिळकतीतील मोठा हिस्सा खर्च केला.


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                 11. लुंबनी पार्क, हैदराबाद।

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हैदराबाद का लुंबनी पार्क हुसैन सागर झील के ठीक बगल में स्थित है। शहर के बीच में होने और दूसरे पर्यटन स्थलों से नजदीकी के कारण यह हैदराबाद का एक चर्चित आकर्षण है। वैसे तो इस पार्क का निर्माण 1994 में किया गया था, पर उसके बाद से इसे हर आयु वर्ग के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए इसका कई बार नवीनीकरण किया गया।

आज लुंबनी पार्क में लेजर ऑडिटोरियम, बोटिंग की सुविधा, गार्डन और म्यूजिकल फाउंटेन है। इससे यह पार्क परिवार के साथ पिकनिक मनाने का एक अच्छा विकल्प बन गया है।

यहां का लेजर ऑडिटोरियम देश में अपने तरह का पहला लेजर ऑडिटोरियम है और यहां 2000 लोगों के बैठने की सुविधा है। आप हर दिन यहां हैदराबाद के इतिहास पर आधारित शो को हिंदी और इंग्लिश में देख सकते हैं।

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              12.  स्नो वर्ल्ड, हैदराबाद।

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स्नो वर्ल्ड मनोरंजन की दृष्टि से मील का पत्थर है।

स्नो वर्ल्ड का उद्घाटन सन् 2004 में किया गया था।स्नो वर्ल्ड दुनिया का सबसे बड़ा और भारत का पहला स्नो फॉल थीम उद्यान है।

यह उद्यान 17 हज़ार वर्ग फुट में फैला हुआ है।

इस उद्यान का तापमान -5 से 0 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है।

इस उद्यान में बर्फ़ से एक पूरा माहौल तैयार किया गया है, यहाँ पोलर बियर व पेंगुइन की बर्फ़ से बनी मूर्तियाँ और इग्लू जैसे घर भी बने हुए हैं।इस उद्यान में बर्फ़ स्लाइड का मजा भी लिया जा सकता है।इसमें हर ग्रुप को भेजने के दौरान 10 मिनट के लिए स्नो फॉल भी की जाती है।यहाँ पर कपकपा देने वाली ठंड के माहौल में डांस का आनन्द भी किया जा सकता है।


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               13.  मालवां महल, हैदराबाद।

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मालवा महल आंध्र प्रदेश राज्य के  हैदराबाद  शहर में स्थित है।

यह महल लकड़ी से बना हुआ है। इस महल के खिड़कियों और दरवाजों पर बहुत ही सुंदर नक़्क़ाशी की गई है।

यह महल मुग़ल और राजस्थानी शैली में बने उन महलों में से एक है जो अभी तक बचे हुए हैं।

मालवा महल का निर्माण सागरमल ने कराया था।


सागरमल हैदराबाद के पहले निज़ाम के राजस्व की देखरेख करते थे।इन्हीं के नाम पर इसके वंश का नाम मालवा पड़ा।

इस महल के परिसर के तीन मुख्य भाग हैं-दो मंजिला आवासीय क्वाटर्स अर्धवृत्ताकार द्वारविशाल आंतरिक परिसर- जिसके बीच में एक फ़व्वारा है।

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                 14.   लाड बाज़ार ,हैदराबाद।

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लाड बाज़ार हैदराबाद के सबसे पुराने ख़रीददारी केंद्रों में से एक है।

लाड बाज़ार चूड़ियों के लिए प्रसिद्ध है।ये चूड़ियाँ कांच, लाख, मोती समेत कीमती धातुओं की भी होती हैं।ये चूड़ियाँ बहुत ख़ूबसूरत होती हैं। ख़ूबसूरत होने के साथ-साथ ये सस्ती भी होती हैं।

लाड बाज़ार चूड़ियों के अलावा शादी के कपड़ों, मेंहदी, सौंदर्य प्रसाधन, बर्तन आदि के लिए भी मशहूर है।


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                        हैदराबाद कसे पहाल ?

👍 Day 1

1. चारमिनार

वेळ 2 तास

2. मक्का मस्जिद ( चारमिनार जवळील )

वेळ 1:30

3. सालार जंग संग्रहालय

वेळ 3 तास कमीतकमी

4. संध्याकाळी लुंबिनी पार्क पाहणे।


👍 Day 2

1. गोवळकोंडा किल्ला

वेळ 3 तास

2. प्राणी संग्रहालय

वेळ 3 तास

3. संध्याकाळी NTR गार्डन पाहणे।

👍 Day 3

1. फलक नुमा पॅलेस

वेळ 2 तास

2. स्नो वर्ल्ड

वेळ 2 तास

3. लाड बाजार

वेळ 2 तास

4. संध्याकाळी बिर्ला मंदिर पाहणे। येथे डोळ्याचे पारणे फिटतील असे दृश्य आहे।

👍 Day 4

1. हुसेन सागर पाहणे। बोटींग करणे।

2. बुद्ध पुतळा पाहणे

सर्व वेळ 3 तास

3. राज्य संग्रहालय

वेळ 2 तास

4. संध्याकाळी नेक लेस रोड पाहणे।

👍 Day 5

रामजी फिल्म सिटी पाहणे।

जाताना वाटेत sanghi मंदिर आहे ते पाहणे।

वेळ पूर्ण दिवस

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